41वें चक्रधर समारोह का भव्य समापन, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कंटेंट क्रिएटर्स के लिए 2 करोड़ के स्टूडियो की घोषणा की


रायगढ़ में 41वें चक्रधर समारोह का बुधवार को समापन हुआ। समापन समारोह में वित्त मंत्री ओपी चौधरी शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की दसवीं और अंतिम कड़ी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स के लिए 2 करोड़ रुपए की लागत से स्टूडियो बनाने की घोषणा भी की। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भविष्य में और समृद्ध बनाने के लिए सभी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी समारोह में शामिल होने वाले थे, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि राजू नगर में डेयरी, खर्रा घाट में ऑक्सीजोन गार्डन, गजमार पहाड़ और नगर वन के विकास, खेल सुविधाओं के विस्तार और मरीन ड्राइव के विकास का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही कयाघाट पुल, केवड़ावाड़ी पुल, राजा महल के पास पुल और गोवर्धनपुर पुल के निर्माण जैसे काम भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों का चौड़ीकरण, रिंग रोड, स्पोर्ट्स फैसिलिटी, प्रयास विद्यालय, नवगुरु स्कूल, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, फिजियोथेरेपी कॉलेज और नेचुरोपैथी कॉलेज जैसे काम भी रायगढ़ के विकास को नई दिशा देंगे।
चक्रधर समारोह की अंतिम संध्या में बस्तर की माटी से निकली ‘चंदा चकोर’ ने प्रेम और संघर्ष के रंग बिखेरे। अंतिम संध्या में नारायणपुर के नितारा कला केंद्र के कलाकारों ने नाटक ‘चंदा चकोर’ की प्रस्तुति दी। बस्तर के सुदूर अंचल के जीवन, लोक परंपराओं, प्रेम और संघर्ष पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को भावनाओं से जोड़ा। नाटक की कहानी बस्तर के एक ऐसे गांव की है, जहां आधुनिक सुविधाओं का अभाव है, लेकिन प्रकृति, परंपरा और आपसी रिश्तों से जीवन समृद्ध है। गांव का युवक चकोर अपनी मां के साथ रहता है। खेती और जंगल पर निर्भर उसका सरल जीवन तब बदल जाता है, जब बाजार में उसकी मुलाकात चंदा से होती है। चंदा एक समृद्ध और पढ़े-लिखे परिवार से है। दोनों के बीच प्रेम होता है। यही प्रेम चकोर को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की ताकत देता है। नाटक में दिखाया गया कि प्रेम जीवन को बदलने और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की ताकत देता है।
चक्रधर समारोह में आयुष नामदेव ने रायपुर के अपने सियाधेश म्यूजिक बैंड के साथ प्रस्तुति दी। उनकी आवाज और लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर रामलीला मैदान तालियों से गूंज उठा। आयुष नामदेव इंडियन आइडल में अपनी पहचान बना चुके हैं। वे कई म्यूजिक एल्बम का हिस्सा भी रह चुके हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया है।
41वें चक्रधर समारोह की दसवीं और अंतिम संगीत संध्या में भारतीय संगीत जगत की दो पीढ़ियों की सुरीली आवाज का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत जान कुमार सानू की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को संगीत से जोड़ दिया। उन्होंने ‘तू मिले दिल खिले’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी आवाज में उनके पिता और प्रसिद्ध गायक कुमार सानू की संगीत विरासत की झलक भी देखने को मिली।
जान कुमार सानू के बाद पद्मश्री सम्मानित पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने प्रस्तुति दी। उनकी दमदार और भावपूर्ण आवाज ने पूरे माहौल को सुरमयी बना दिया। चार दशक से अधिक लंबे संगीत सफर में भारतीय सिनेमा को यादगार गीत देने वाली कविता कृष्णमूर्ति ने फिल्मी संगीत, शास्त्रीय, भक्ति और समकालीन संगीत का संगम पेश किया। उन्होंने ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’, ‘बोले चूड़ियां, बोले कंगना’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ सहित अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे।
कविता कृष्णमूर्ति के साथ संगीतकारों की टीम ने भी प्रस्तुति में साथ दिया। संजय मराठे और ओमकार देवस्कर ने कीबोर्ड, रिचर्ड मित्रा ने गिटार, सुरेश रामनाथन ने बास, विजय तांबे ने बांसुरी, गिरीश विश्व ने ढोलक, प्रसाद कुलकर्णी ने ड्रम, संकेत ओक ने तबला और सुप्रिया भट्टाचार्य ने कांगो पर संगत की। परिक्षित कुलकर्णी ने साउंड इंजीनियर के रूप में सहयोग दिया।
कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की अंतिम संगीत संध्या को यादगार बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने और सुनने के लिए देर रात तक रामलीला मैदान में दर्शकों की भीड़ जुटी रही।



