छत्तीसगढ़
सिर्फ सोनोग्राफी करने से डॉक्टर नहीं बनेंगे POCSO के आरोपी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला


डॉ. आरती उइके की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्होंने पीसी-पीएनडीटी एक्ट के सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया था। याचिका में यह भी कहा गया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें यह जानकारी थी कि किशोरी की गर्भावस्था किसी यौन अपराध का परिणाम थी।याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि केवल चिकित्सकीय जांच करना और गर्भावस्था की पुष्टि करना, किसी अपराध की जानकारी होने के बराबर नहीं माना जा सकता।




