छत्तीसगढ़

नाबालिग वाहन चालकों पर रायपुर पुलिस सख्त:61 नाबालिगों के परिजनों को दी समझाइश, बच्चों की सुरक्षा के लिए गाड़ी नहीं देने की करी अपील




राजधानी में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए रायपुर पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। विशेष अभियान के तहत शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर जांच के दौरान 61 नाबालिग छात्रों को दोपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा गया। सभी छात्रों के अभिभावकों को शाम 5 बजे यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी बुलाकर काउंसलिंग की गई और भविष्य में नाबालिगों को वाहन नहीं देने की समझाइश दी गई। डीसीपी बोली बच्चों को सुरक्षित करना उद्देश्य पुलिस कमिश्नरेट रायपुर में डीसीपी (यातायात) डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी स्कूलों के बाहर नियमित जांच अभियान जारी रहेगा। काउंसलिंग कार्यक्रम में डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने अभिभावकों से कहा कि पुलिस का मकसद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बच्चों की जान बचाना है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े वीडियो और प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि कम उम्र में वाहन चलाना बच्चों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। 25 हजार रुपए तक का जुर्माना, तीन साल तक की सजा पुलिस ने अभिभावकों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A की जानकारी देते हुए बताया कि नाबालिग को वाहन चलाने देना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक या अभिभावक पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना, तीन साल तक की सजा और नाबालिग के 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी निर्धारित अवधि तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किए जाने का प्रावधान है। बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का ही करें उपयोग चूंकि अधिकांश मामलों में यह पहली गलती थी, इसलिए बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा गया। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे सुविधा के लिए नाबालिग बच्चों को दोपहिया वाहन न दें और स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस या अन्य सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का ही उपयोग करें।



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