E-20 फ्यूल से खराब हुई कार तो मारुति देगी नई गाड़ी या लौटाएगी 20.50 लाख रुपये, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसी कार बेची जाती है, जो ई-20 ईंधन के अनुकूल नहीं है और उसके कारण वाहन में तकनीकी खराबी आती है, तो इसकी…और पढ़ें

HighLights
- E-20 अनुकूल न होने पर कार खराब हुई तो मेकर और डीलर दोनों जिम्मेदार
- उपभोक्ता आयोग का फैसला: मारुति सुजुकी ग्राहक को दे 20.50 लाख रुपये
- 17 माह पुरानी तकनीक की कार नई बताकर बेची, कंपनी कोर्ट में देगी चुनौती
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। देशभर में ई-20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बीच रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ताओं के हित में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसी कार बेची जाती है, जो ई-20 ईंधन के अनुकूल नहीं है और उसके कारण वाहन में तकनीकी खराबी आती है, तो इसकी जिम्मेदारी वाहन निर्माता और अधिकृत डीलर दोनों की होगी। आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके डीलर को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की नई ई-20 अनुकूल कार देने अथवा 20.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है।
मामला रायपुर के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता का है। उन्होंने तीन जून 2024 को 20.50 लाख रुपये में नई एसयूवी खरीदी थी। शुरुआती महीनों में वाहन सामान्य रूप से चला, लेकिन नवंबर 2024 से इंजन में लगातार खराबी आने लगी। चलते-चलते वाहन बंद होने लगा और कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा।
दूसरी जांच में ईंधन टैंक से सफेद रंग का तरल और जेली जैसा पदार्थ मिला। कंपनी के तकनीकी कर्मचारियों ने टैंक पूरी तरह साफ नहीं होने की बात स्वीकार की, लेकिन मरम्मत के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई। अंततः पांचवीं बार इंजन पूरी तरह ठप हो गया। एडवोकेट पीके निषाद ने बताया कि आयोग ने उपभोक्ता के हित में फैसला दिया है।
लैब रिपोर्ट ने खोली सच्चाई
सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की जांच में पुष्टि हुई कि वाहन में डाला गया ईंधन ई-20 श्रेणी का था। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि उपभोक्ता को बेची गई कार की तकनीक करीब 17 माह पुरानी थी और वह ई-20 ईंधन के अनुरूप नहीं थी। आयोग ने माना कि जिस ई-20 ईंधन को सरकार बढ़ावा दे रही है, उसी के इस्तेमाल से वाहन में गंभीर तकनीकी खराबी आई।
क्या कहा था आयोग ने?
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वाहन की वास्तविक तकनीकी क्षमता और ई-20 ईंधन के साथ उसकी अनुकूलता की जानकारी देना निर्माता और विक्रेता की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसी जानकारी छिपाकर वाहन बेचना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता को 17 माह पुरानी तकनीक वाली कार नई बताकर बेची गई और ई-20 ईंधन के कारण इंजन खराब होने के लिए उपभोक्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
मारुति सुजुकी का पक्ष: ई-20 के अनुकूल थी कार, फैसले को देंगे चुनौती
मारुति सुजुकी ने दावा किया है कि संबंधित कार ई-20 ईंधन के अनुकूल थी और इसकी जानकारी वाहन के ओनर मैनुअल में भी स्पष्ट रूप से दी गई थी। वे आयोग के आदेश को उच्च स्तर पर चुनौती देंगे। कंपनी ने आयोग के समक्ष दलील दी थी कि वाहन में आई खराबी ई-20 ईंधन से नहीं, बल्कि मिलावटी ईंधन के उपयोग के कारण हुई है। हालांकि आयोग ने कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
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