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91.14 लाख के जीपीएफ घोटाले की जांच तीन साल से अटकी, शिकायतकर्ता का बयान तक दर्ज नहीं

शिक्षा विभाग में 91.14 लाख रुपए के जीपीएफ घोटाले की जांच तीन साल से अटकी हुई है। जांच समिति को सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन साल में तीन बार जांच समितियों का पुनर्गठन हो चुका है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का बयान तक दर्ज नहीं किया गया।

मामला सरायपाली के सरकारी हाई स्कूल के दिवंगत प्राचार्य रामकृष्ण बंछोर के जीपीएफ खाते का है। नियमों में साल में एक बार एडवांस या पार्ट-फाइनल निकासी का प्रावधान है, लेकिन सितंबर 2011 से दिसंबर 2013 के बीच बेटे की शादी के नाम पर 10 बार राशि निकाली गई। इनमें 2011 में दो, 2012 में चार और 2013 में चार आहरण शामिल हैं।

इसके अलावा सितंबर 2011 से मई 2015 तक बेटी की शादी के नाम पर चार बार राशि निकाली गई। बेटी की शादी के नाम पर सितंबर 2011, मई 2012, दिसंबर 2014 और मई 2015 में आहरण हुआ। पत्नी के इलाज के नाम पर भी बार-बार आहरण किया गया। नियमानुसार जीपीएफ खाते से अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए अधिकतम 10 बार राशि निकाली जा सकती है, लेकिन यहां 14 बार राशि निकाली गई।

2018 तक खाते में 91.14 लाख रुपए ऋणात्मक शेष हो गया। 22 जुलाई 2018 को बंछोर की मृत्यु के बाद डीपीआई ने वसूली के निर्देश दिए, लेकिन डीईओ कार्यालय ने मृत्यु का हवाला देकर वसूली नहीं की। बाद में उनके बेटे प्रमोद बंछोर को सहायक ग्रेड-3 में अनुकंपा नियुक्ति भी दी गई।

मामले में नया खुलासा 8 जून 2026 के संशोधित आदेश से हुआ। 2025 में जांच समिति के अध्यक्ष बनाए गए डीईओ विजय कुमार लहरे खुद भ्रष्टाचार मामले में निलंबित हो गए। जांच करने जिसे अधिकारी बनाया गया, वह खुद निलंबित हो गया। इसके बाद नए डीईओ बीएल देवांगन की अध्यक्षता में समिति बनाई गई।

9 सितंबर को शिकायतकर्ता की उपस्थिति दर्ज कर अगली सुनवाई के लिए नोटिस जारी करने की बात कही गई। अब शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव से शिकायत की है।

डीईओ महासमुंद बीएल देवांगन ने बताया कि जीपीएफ राशि में गड़बड़ी की जांच अंतिम चरण में है और जल्द रिपोर्ट अफसरों को भेजी जाएगी। बेटे-बेटी के नाम पर 14 बार राशि निकाले जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बेटे की शादी के नाम पर 10 बार और बेटी की शादी के नाम पर 4 बार राशि निकाली गई और कार्रवाई होगी।

गड़बड़ी के बावजूद बिना शपथ-पत्र लिए मृतक के बेटे को नियुक्ति दिए जाने के सवाल पर देवांगन ने कहा कि तत्कालीन डीईओ बीएल कुर्रे ने गलत तरीके से बिना शपथ-पत्र लिए प्रमोद बंछोर को अनुकंपा नियुक्ति दी।

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