छत्तीसगढ़

75 लाख की सीसी सड़क 24 महीने में जर्जर, काठाडीह में पहिए फंसने से हादसों का डर


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर के मुजगहन थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत काठाडीह में सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों के लंबे संघर्ष के बाद करीब दो वर्ष पूर्व 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीसी सड़क अब जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने लगी है। सड़क पर उभरी गहरी और चौड़ी दरारों ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि राहगीरों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है।

तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप

करीब पौन किलोमीटर लंबी इस सीसी सड़क का निरीक्षण करने पर कई तकनीकी खामियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान आधार परत को मजबूत बनाने के लिए मुरूम बिछाने और उसकी समुचित रोलिंग का कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। इसके अलावा कंक्रीट सड़क में तापमान और दबाव के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए लगाए जाने वाले एक्सपेंशन ज्वाइंट्स की डिजाइनिंग और फिलिंग में भी गंभीर लापरवाही बरती गई।

ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं तकनीकी त्रुटियों के कारण सड़क के बीचोंबीच लंबी और गहरी दरारें विकसित हो गई हैं, जो समय के साथ और चौड़ी होती जा रही हैं।

सड़क बनी दुर्घटनाओं का कारण

सड़क पर बनी दरारें अब वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के पहिए इन दरारों में फंस रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार बाइक सवार संतुलन खोकर गिर चुके हैं।

रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि बाहरी और अनजान वाहन चालक इन दरारों को समय पर देख नहीं पाते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क की खराब स्थिति के बारे में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी समस्या की अनदेखी कर रहे हैं।

इस मामले में एसडीओ राजेश नशीने से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। उल्लेखनीय है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री पहले ही गारंटी अवधि वाली सड़कों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं।

बारिश में बढ़ सकती है समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उन्हें वर्षों के संघर्ष के बाद मिली थी। पहले यहां धूल और बरसात के मौसम में कीचड़ की समस्या बनी रहती थी। अब सड़क बनने के महज दो वर्ष बाद ही उसकी स्थिति खराब हो गई है।

स्थानीय लोगों को आशंका है कि मानसून शुरू होने के बाद दरारों के माध्यम से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच जाएगा, जिससे सड़क और अधिक कमजोर हो सकती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो कंक्रीट के बड़े हिस्से उखड़ सकते हैं और सड़क धंस सकती है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को सुशासन तिहार के शिविर में उठाकर जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ शिकायत करेंगे।



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