छत्तीसगढ़

छतरपुर में जबरन शादी और मानव तस्करी… 1 लाख में नाबालिग को बेचने वाला फरार दंपती रायपुर से गिरफ्तार


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। नाबालिग बालिका को एक लाख रुपये में बेचने के आरोप में 18 माह से फरार चल रहे दंपती को गुढ़ियारी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित राजेंद्र कामडे उर्फ राजेश यादव (40), निवासी ग्राम टेंडवा, थाना लांजी, जिला बालाघाट (मध्य प्रदेश) और लक्ष्मी यादव (34), निवासी ग्राम पेंड्राकापा, थाना कोतवाली, जिला मुंगेली हैं।

पुलिस के अनुसार, दोनों ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर मध्य प्रदेश के छतरपुर ले जाने के बाद वहां जबरन विवाह कराने की घटना को अंजाम दिया था। मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपितों से पूछताछ में नाबालिग को एक लाख रुपये में सौंपे जाने की बात सामने आई थी।

21 फरवरी 2025 को घर से लापता हुई थी बालिका

गुढ़ियारी निवासी प्रार्थिया ने 21 फरवरी 2025 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी रात करीब तीन बजे घर से बिना बताए चली गई है। पुलिस ने गुम इंसान दर्ज कर बालिका की तलाश शुरू की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन और थाना प्रभारी गुढ़ियारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने परिजनों से पूछताछ के साथ तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बालिका की तलाश की। पुलिस टीम ने बालिका को दस्तयाब करने के बाद उससे पूछताछ की। बालिका ने बताया कि राजेश नामक व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर मध्य प्रदेश के छतरपुर ले गया था। वहां बाबूलाल नामक व्यक्ति से उसकी जबरदस्ती शादी करा दी गई।

बाबूलाल और सुषमा पहले पकड़े गए

बालिका के बयान के आधार पर गुढ़ियारी थाने में अपराध क्रमांक 55/2025 दर्ज किया गया। मामले में धारा 137(2), 64, 143, 144, 61 बीएनएस एवं धारा 4, 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने 1 अप्रैल 2025 को बाबूलाल अहिरवार और सुषमा पटेल को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ में पुलिस को मामले की अहम कड़ी मिली। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर बताया कि राजेश यादव और उसकी पत्नी लक्ष्मी यादव ने नाबालिग बालिका को एक लाख रुपये में उन्हें सौंपा था।

18 माह से बदल रहे थे ठिकाने

घटना के बाद राजेश यादव और लक्ष्मी यादव लगातार फरार चल रहे थे। पुलिस टीम ने दोनों की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश समेत अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी। पुलिस उनकी गतिविधियों और संपर्कों पर नजर रखते हुए तकनीकी माध्यमों से भी जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान पुलिस को दोनों के रायपुर में मौजूद होने की महत्वपूर्ण सूचना मिली। सूचना के आधार पर टीम ने उनकी पतासाजी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

राजेश ने बदल रखी थी पहचान

पुलिस पूछताछ में राजेश यादव ने अपना नाम राजेंद्र कामडे होना बताया। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि की। गिरफ्तार आरोपित राजेंद्र कामडे पिता वामनराव कामडे, उम्र 40 वर्ष, ग्राम टेंडवा, थाना लांजी, जिला बालाघाट (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है। वहीं लक्ष्मी यादव पति श्याम बिहारी यादव, उम्र 34 वर्ष, ग्राम पेंड्राकापा, थाना कोतवाली, जिला मुंगेली की निवासी है।

इनाम भी घोषित किया गया था

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में फरार दंपती की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। दोनों के खिलाफ नकद इनाम की घोषणा भी की गई थी। करीब 18 माह तक फरार रहने के बाद आखिरकार पुलिस टीम ने दोनों को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका और नाबालिग को एक लाख रुपये में सौंपे जाने से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

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